बिहार बोर्ड वर्ग 12 वीं इतिहास
Chapter 03- बंधुत्व , जाति तथा वर्ग
प्रश्न संख्या 01 : ब्राह्मी
और खरोष्ठी लिपि में क्या अंतर है
उत्तर :- ब्राह्मी और खरोष्ठी प्राचीन भारतीय लिपियाँ
हैं। ब्राह्मी बाईं से दाईं ओर लिखी
जाती थी और इसमें सभी स्वर वर्णों के अलग रूप थे, जो देवनागरी जैसी आधुनिक भारतीय लिपियों का आधार बनी। इसका
उपयोग व्यापक क्षेत्र में होता था। वहीं, खरोष्ठी दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी और इसमें स्वरों
के लिए सीमित प्रतीक थे, मुख्य रूप से इसका
प्रयोग पश्चिमोत्तर भारत में होता था।
प्रश्न संख्या 02:- महाभारत में वर्णित किन्ही चार
विवाहों के प्रकार लिखो
उत्तर :- महाभारत में विवाह के आठ प्रकारों का उल्लेख है।
उनमें से चार प्रमुख प्रकार हैं:
- ब्रह्म विवाह:
दोनों पक्षों की सहमति से,
सुयोग्य वर से कन्या का विवाह। इसे
सबसे उत्तम माना जाता है।
- दैव विवाह: यज्ञ संपन्न कराने वाले पुरोहित को कन्या का दान करना।
- गंधर्व विवाह:
वर और कन्या की स्वेच्छा से
प्रेमपूर्वक किया गया विवाह (प्रेम विवाह)।
- राक्षस विवाह:
बलपूर्वक कन्या का हरण कर उससे
विवाह करना।
प्रश्न संख्या
03:- वर्ण और जाति में कोई दो अंतर बताइए
उत्तर :- वर्ण: यह कर्म और गुणों
पर आधारित सामाजिक वर्गीकरण था। मूल रूप से चार वर्ण थे - ब्राह्मण (विद्वान), क्षत्रिय (योद्धा), वैश्य (व्यापारी)
और शूद्र (सेवक)। यह व्यवस्था अपेक्षाकृत लचीली थी, और व्यक्ति के कर्मों के आधार पर वर्ण बदल सकता था।
जाति: यह जन्म पर आधारित
एक अधिक कठोर और वंशानुगत प्रणाली है। इसमें हजारों उप-जातियां शामिल हैं, जिनके बीच सामाजिक
गतिशीलता (एक जाति से दूसरी जाति में जाना) बहुत कम होती है। जाति व्यवस्था ने
सामाजिक पदानुक्रम और व्यवसायों को अधिक दृढ़ता से निर्धारित किया।
प्रश्न संख्या
04:- प्राचीन भारत में वर्ण व्यवस्था पर प्रकाश डालें
उत्तर :- प्राचीन
भारत में वर्ण व्यवस्था समाज को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित करती थी:
ब्राह्मण (विद्वान, पुरोहित),
क्षत्रिय (योद्धा, शासक), वैश्य (व्यापारी,
किसान) और शूद्र (सेवक, मजदूर)। इसका उल्लेख ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में मिलता है।
शुरुआती वैदिक काल में यह व्यवस्था कर्म और गुणों पर आधारित तथा लचीली मानी जाती
थी, जहाँ व्यक्ति अपनी
योग्यता से वर्ण बदल सकता था। हालांकि, बाद के समय में यह जन्म-आधारित और अधिक कठोर होती गई, जिससे सामाजिक गतिशीलता कम हो गई और यह जाति व्यवस्था के
रूप में विकसित हुई।
प्रश्न संख्या 05 :- श्रीमाद्भाग्वात्गीता
पर संशिप्त वर्णन करे
उत्तर :- श्रीमद्भगवद्गीता
हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है। यह कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में
भगवान कृष्ण और अर्जुन के संवाद के रूप में है। इसमें कर्मयोग, ज्ञानयोग और
भक्तियोग के सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन है। कृष्ण अर्जुन को उसके कर्तव्य (धर्म)
का पालन करने, फल की चिंता किए
बिना कर्म करने और आत्मा की अमरता का उपदेश देते हैं। यह जीवन के नैतिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर गहन
मार्गदर्शन प्रदान करती है।
प्रश्न संख्या 06 :- गोत्र से आप क्या
समझते है
उत्तर :- हिंदू
धर्म में, गोत्र एक वंश या कुल प्रणाली है
जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश को एक प्राचीन ऋषि तक ले जाती है। यह एक ही पुरुष
पूर्वज से निकले लोगों के समूह को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी का गोत्र 'कश्यप' है, तो वे कश्यप ऋषि के वंशज माने जाते हैं। गोत्र
का मुख्य उपयोग विवाह संबंधों में होता है, जहाँ एक ही गोत्र में विवाह वर्जित माना जाता है क्योंकि
उन्हें एक ही परिवार का सदस्य माना जाता है।
प्रश्न संख्या 07 :- बहिर्विवाह
पद्धति से आप क्या समझते है . यह अंतर्विवाह से कैसे भिन्न है
उत्तर :- बहिर्विवाह
पद्धति (Exogamy): इस प्रथा में
व्यक्ति अपने समूह, गोत्र या कुल से बाहर विवाह करता है। इसका उद्देश्य रक्त संबंधों को बचाना और
आनुवंशिक विविधता बनाए रखना है। उदाहरण के लिए,
एक ही गोत्र में विवाह न करना बहिर्विवाह का एक रूप है।
अंतर्विवाह पद्धति
(Endogamy): इसके विपरीत, अंतर्विवाह में
व्यक्ति अपने ही विशिष्ट सामाजिक समूह, जैसे जाति, उपजाति या धर्म के भीतर विवाह करता है। यह समूह की शुद्धता और पहचान बनाए रखने
पर केंद्रित होता है।